कहानी - पहला प्यार (story - Pehla Pyar) | Love Story | Hindi Story

शादी-ब्याह का माहोल था सब बहुत खुश थे। उन दिनों नैना का अपने रिश्तेदार के विवाह में आना हुआ। नैना बहुत जल्दी ही सबसे घुलमिल जाती थी, उसका व्यवहार ही कुछ एसा था सब लोग जल्द ही उससे आकर्षित हो जाते थे। 

उसी दौरान अमन का भी शादी में आना हुआ। अमन, नैना से बिलकुल विपरीत मिजाज का बहुत ही सरल स्वाभाव का था नैना को उसका यह स्वाभाव पसंद आया धीरे-धीरे उन दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी। एक दिन अमन ने नैना से बोला कि, “मेरा दोस्त दिनेश तुम्हे बहुत पसंद करता है”  नैना ने मुस्कुराकर जवाब दिया में उसे नहीं तुम्हे पसंद करती हूँउसने यह सब मजाक में बोला बस उसके दोस्त से पीछा छुड़ाने के लिए। अमन के जाने के बाद वह बहुत हँसी और यह बात उसने मजाक में टाल दी। नैना को अमन से बाते करना अच्छा लगने लगा अब वो दिन भी आ गया जब उनको अपने-अपने घर वापस लौटना था।

नैना का मन बेचैन रहने लगा किसी भी काम में अपना ध्यान नहीं लगा पा रही थी उसके ज़हन में बस वही सब चल रहा था जो पल उसने अमन के साथ बिताये। नैना जिस शादी में गयी थी वहाँ से उसने अमन के फ़ोन नंबर पता किये। उसी शाम को अमन को अनजान नंबर से कॉल आता है जब उसने कॉल उठाया तो वो चोंक गया क्योंकि फ़ोन पे उसकी अपनी दोस्त नैना थी। फिर जब उनकी बाते होने लगी तो पता चला कि जो हाल नैना का हो रहा था वही हाल खुद अमन का भी था। वो दोनों खुद नहीं जानते थे कब उनकी दोस्ती प्यार में बदल गयी वक़्त के साथ प्यार ओर भी गहरा होने लगा। अब हालात ये थे कि अमन, नैना को देखे बिना नहीं रह पाता था। एक ही शहर में रहने की वजह से अमन उसे देखने के लिए उसके घर के चक्कर लगाता। अमन उससे काफी ज्यादा प्यार करने लगा समय बीतता गया ओर नैना अपने कॉलेज में व्यस्त रहने लगी वह अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताने लगी इस तरह वह अमन से दूर होती गयी उसके पास अमन से बात करने का भी समय नहीं था।

उधर अमन, नैना के इस दुर्व्यवहार से बहुत दुखी रहने लगा मानो उसकी जिंदगी से किसी ने खुशियाँ छीन ली हो। एक समय ऐसा आया जब नैना ने अमन से बात करने से ही इन्कार कर दिया अमन ने उसे बहुत समझाने कि कोशिश की पर वो नहीं मानी उसने साफ़ बोल दिया कि मुझे तुमसे कोई रिश्ता नहीं रखना। कुछ समय तो बहुत मुश्किल से गुज़रा लेकिन अमन ने भी उससे दूरी बनाने कि ठान ली। वो कहते हेना जिस दर्द का कोई इलाज नहीं होता वक़्त उसका इलाज होता है.

अब अमन का वक़्त अपने आप में गुजरने लगा जितना हो सके उसने अपने आप को व्यस्त कर लिया अपनी पढाई में ओर इसी तरह उसने अपने आप को नैना से दूर कर लिया ओर आगे बढ़ गया। उधर नैना का कॉलेज भी ख़त्म होने को था ओर उसे आगे की पढाई के लिए दुसरे शहर जाना पड़ा अब नैना बिलकुल अकेली हो गयी अनजान शहर में ओर फिर वापस से उसे अमन कि याद सताने लगी उसे अमन का वो पागलपन याद आने लगा जो उसके लिए कुछ भी कर सकता था। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ जो सब उसने अमन के साथ किया लेकिन अब वो अमन को नहीं खोना चाहती थी। उसने बहुत कोशिश की अमन से बात करने की लेकिन अमन ज्यादा देर उससे बात नहीं करता था जिस हालत में पहले अमन था अब उसी हालात से नैना को गुजरना पड़ रहा था। अमन, नैना से दूर जा चुका था। नैना ने बहुत माफ़ी मांगी पर अमन नहीं माना ओर उसने नैना को खुद से दूर रहने की सलाह दी। नैना ने उसे जितना भूलना चाहा वो उसे उतना ही ज्यादा याद आता। नैना बहुत रोती पर अमन अब बिल्कुल बदल चुका था। लेकिन नैना ने भी ठान लिया था कि कुछ भी हो जाए अब वो अमन को अपने से दूर नहीं जाने देगी उसे पूरा विश्वास था के अमन उसकी ज़िन्दगी में लोटकर वापस जरुर आयेगा।

समय बीतता गया ओर इसी दौरान अमन के साथ एक घटना घटित हुई। उसका किसी दोस्त के घर जाना हुआ ओर उसने वहाँ क्या देखा कि एक बूढा आदमी जो कैंसर पीड़ित है जिसकी जीने कि ओर कोई उम्मीद बाकी नहीं है। उसकी पत्नी दिन रात उसकी सेवा बड़ी निष्ठां के साथ करती ये सब देख कर अमन के मन में विचार आया कि ज़िन्दगी में कभी अगर ऐसी दुर्दशा मेरी होती है तो क्या कोई इस तरह मेरा ख्याल रख पायेगा। ये सब देख कर उसको नैना के प्यार का एहसास हुआ ओर उसने तय किया कि अब वो नैना का साथ ज़िन्दगी भर नहीं छोड़ेगा उन वृद्ध दंपति के जीवन को देखकर उसे यह प्रेरणा मिली 

उधर नैना का जन्मदिन भी निकट ही था ओर अमन बहुत खुश था उसने सोचा कि जन्मदिन के शुभ अवसर पर ही क्यों न शादी का प्रस्ताव रखा जाए  और फिर वो दिन भी आ गया अमन ने ठीक 12 बजे जन्मदिन की शुभकामना दी। नैना भी बेसब्री से अमन के फोन का इंतजार कर रही थी 

अमन ने पूछा बताओ नैना तुम्हे उपहार में क्या चाहिए” “मुझे सिर्फ अपनी पूरी ज़िन्दगी तुम्हारा साथ चाहिएनैना ने जवाब दिया। इतना बोलकर नैना कि आँखों से आसू बहने लगे

अमन ने जेसे-तेसे उसे चुप करवाया ओर प्यार से कहा मैं तुम्हारा ही तो हूँ मेरी जीवनसाथी बनोगी नैनायह सुनकर नैना कि ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह जन्मदिन उसकी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा दिन साबित हुआ। अब दोनों में बहुत प्यार रहने लगा ओर एक समय एसा भी आया जब वो दोनों शादी के पवित्र बंधन में बंध गए

कहते हैना जहाँ प्रेम होता है वहां दुनिया की हर ख़ुशी होती है  ऐसी कहानी अमन ओर नैना की भी

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