कहानी- कैसे कैसे रिश्ते | Story- Kaise Kaise Rishte | Hindi Story

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 कोमल अपने पति आकाश के साथ उदयपुर से लौट रही थी बस स्टैंड जाने के लिए उन्होंने एक सवारी गाडी की, उन दोनों के अलावा एक लड़का उनकी बगल वाली सीट पर बैठा हुआ था। लड़का बार-बार कोमल को देखता ओर नजरे चुराता, कोमल को उसका यह व्यवहार कुछ ठीक नहीं लगा इसलिए वह आकाश के कंधे पर सिर रखकर सो गयी


बस स्टैंड आने पर आकाश ने उसे जगाया ओर कहा तुम बाहर चलो में सामान लेकर आता हूँ। वह बाहर पहुँचीं ही थी कि वह लड़का आया और हँसते हुए बोला "भाभीजी आप तो सोने में इतनी व्यस्त थी कि अपना पर्स वही नीचे गिरा आयी, आपसे तो बात भी न हो पायी बस पूरे रास्ते आपके पति से बतियाते रहे


कोमल हल्की सी मुस्कुरा दी और पर्स लौटाने के लिए उसे धन्यवाद कहा


धन्यवाद से काम नहीं चलेगा, मेरा आपके शहर आना-जाना लगा रहता है इस बार आपके घर आऊंगा तो चाय पिलानी पड़ेगी


कोमल ने बात को मजाक में टालते हुए कहा ..अवश्य |


इतने में आकाश आ गए और दोनों ने उसे गुड-बाय कहा और घर आने को आमंत्रित किया


सफ़र में मिले ऐसे अनजान लोगो से जान-पहचान हो जाती है। ओर हम घर आने को भी कह देते है और बात वहीँ ख़त्म हो जाती है। पर इस बार यहाँ कुछ अलग हुआ 


लगभग 15-20 दिन बाद सुबह के 8 बजे कोमल के घर की डोर बेल बजी। नौकर रामू ने दरवाजा खोला ओर हॉल में आकर बोला "साहब कोई राकेश आये है आपसे मिलने"


कोमल ने पूछा कौन.. राकेश ?

"अरे वही जो उदयपुर से लौटते वक़्त बस में मिला था" आकाश ने कहा 

यहाँ कैसे..? कोमल ने दुबारा पूछा 

 "मिलते है" ..आकाश बोले


फिर कमरे में से कोमल को आवाज़ आई ..और भाई-साहब क्या हाल है आपके, जैसे ही यहाँ आना हुआ सीधा आपके पास चला आया चाय पीने। सोचा फिर कहाँ होटल जाऊंगा इसी बहाने आपसे भी मुलाकात हो जाएगी। फिर यही से अपने काम पर निकल जाऊंगा 

आकाश बोला.. हाँ हाँ जरुर.. आओ


कोमल ने रामू के साथ मिलकर नाश्ता टेबल पर लगाया ओर सब नाश्ता करने बैठ गए तभी राकेश बोला ..ओर भाभीजी.. अब कैसी है आपकी तबियत 

अच्छी है ..कोमल बोली

उस दिन आपसे इतनी बातचीत नहीं हो पायी। नए लोगों से दोस्ती करना अपना परिचय बढ़ाना मुझे बहुत अच्छा लगता है 


कोमल ने उसकी बात पर हल्की सी मुस्कान दी। आकाश भी वेसे ज्यादा बात नहीं करते थे पर राकेश काफी था अपने आप में बात करने के लिए। चाय पीते-पीते आकाश ने कहा कि तुम्हारे शहर में एक आदमी है जो कंपनी का पैसा दबा के बेठा है। अगर तुम कुछ कर सको तो देखना । राकेश ने पूरी ज़िम्मेदार के साथ बोला कि वो उसका काम कर देगा। कोमल को यह सब बहुत अजीब सा लगा ..ऐसे किसी अजनबी का घर चले आना ओर चाय कि फरमाइश करना |


वह आकाश से बोली.. मुझे कुछ ठीक नहीं लगा इस लड़के का यहाँ आना 

आकाश बोले "आ गया होगा ऐसे ही होते है कुछ लोग, और अच्छा ही हेना अगर इसने मेरा काम करवा दिया तो ऑफिस में मेरा बहुत नाम होगा "


कोमल चुप हो गयी। कुछ हफ्ते ही बीते थे कि सुबह आकाश के ऑफिस जाने का समय था, राकेश उसी वक़्त आ धमका और बोला ऑफिस जा रहे है भाई-साहब 

हाँ बस निकल ही रहा हूँ, ..क्या हुआ फिर उससे बात हुई तुम्हारी ..आकाश ने काम के बारे में पूछा 

हाँ उससे बात हुई मेरी ..वो पैसा लौटा देगा थोड़े समय में ..राकेश ने जवाब दिया 

इतनी ही बात हुई थी कि आकाश को जल्दी थी तो वो ऑफिस के लिए निकल गए 

राकेश मुस्कुराकर बोला.. ठीक है तो फिर आप चलिए मैं भी भाभीजी के हाथ कि चाय पीकर निकल जाऊंगा


कोमल ने रामू को चाय-नाश्ता लगाने को कहा । रामू घर का पुराना नौकर था उसे भी राकेश का घर पर चले आना अच्छा नहीं लगता था, उसने फटाफट उसको चाय पिलाकर विदा किया |


फिर वही हुआ अभी दस-बारह दिन ही बीते थे कि दिन के 2 बजे फिर से डोर बेल बजी। कोमल ने दरवाजा खोला तो देखा सामने राकेश खड़ा था  ..और भाभीजी कैसी है आप, वो मैं इधर से निकल रहा था तो सोचा आपसे मिलता चलूँ। उसे अचानक देखते ही कोमल कुछ बोल नहीं पायी ओर गेट खोलकर एक तरफ हो गयी ओर बोली ..इस वक़्त यहाँ कैसे..

लगता है आपको मेरा आना अच्छा नहीं लगा ..राकेश बोला

कोमल को ये सुनकर गुस्सा तो बहुत आया पर कुछ बोल न सकी । फिर बोली.. इस समय  तो वो ऑफिस में होते है, आप सीधे वहां चले जाते

नहीं वो तो मैं इधर से गुजर रहा था तो सोचा आपके हाथ की चाय पीता हुआ चलूँ। कोमल ने बरामदे में जाकर बच्चो व रामू को बुलाया ओर अपने पास आने को कहा। राकेश झट से रोकते हुए बोला ..अरे रहने दीजिये अगर बच्चे खेलने में व्यस्त हैं तो। चलिए आज मैं आपको चाय पिलाता हूँ अपने हाथ की

ये अब कोमल से बर्दाश्त नहीं हो रहा था ..यह तो ऐसे गले पड़ रहा था जैसे कोई खासम-खास रिश्तेदार हो


रामू ने राकेश का नाम सुना तो ऊपर दौड़ा चला आया। कोमल ने उसे एक तरफ जाकर समझाया कि जब तक राकेश यहाँ है तब तक उसी के पास बैठे रहना। बच्चो से कोमल ने कुछ नहीं कहा बस ऊपर अपने पास बुला लिया। इधर-उधर की फालतू बाते करके राकेश वहां से चला गया


शाम को जब आकाश घर आये कोमल गुस्से से आग-बबूला हो रही थी ..आपने राकेश को कैसे इतनी छूट दे राखी है, बार-बार क्यों यहाँ चला आता है किसी भी समय, मैं घर पे अकेली होती हूँ ..तुमसे मिलना हो तो फ़ोन करे या घर के बाहर मिले, यहाँ क्यों?

आकाश बोले.. ऐसा भी क्या हो गया है, हो सकता है घर पे खुश-खबरी देने आया हो । उस कस्टमर ने कंपनी का पेमेंट कर दिया है। तुम बिना कुछ सोचे उस पर शक कर रही हो। उसने इतना बड़ा काम किया है हमारा |

हाँ हो सकता है ..उसका स्वभाव देखकर तो कभी कुछ एसा नहीं लगा लेकिन मन में अजीब से ख्याल आते है डर सा लगता है जब वो यहाँ अचानक आता है। आकाश कि बात सुनकर कोमल सोचने लगी आखिर ये राकेश चाहता क्या है? कोई भी अजनबी किसी की मदद क्यों करेगा। उसका डर राकेश के प्रति ओर बढ़ गया |


दस-पन्द्रह दिन ही बीते थे। दोपहर के समय फिर से राकेश बच्चो के लिए गिफ्ट लेकर पहुँच गया और आते ही बच्चो को इधर-उधर ढूंढने लगा 

कोमल गिफ्ट देखकर बोली ..सॉरी राकेश जी पर मेरे बच्चे अजनबी से गिफ्ट नहीं लेते 

मैं अभी तक आपके लिए अजनबी हूँ भाभी जी ..राकेश ने कहा 

कोमल बोली ..मैं सिर्फ आपका नाम ही जानती हूँ ओर कुछ नहीं इसलिए आप अजनबी ही हैं हमारे परिवार के लिए

मैं तो आपको अपना समझता हूँ। इस शहर में सिर्फ आपके घर को मैं अपना मानता हूँ.. राकेश बोला

सॉरी, राकेश जी पर आप मुझसे उम्र में काफी छोटे है। मुझे बोलते हुए अच्छा तो नहीं लग रहा लेकिन आपकी मित्रता आकाश जी से है। आप उनसे मिलने उनके ऑफिस भी जा सकते है। मैं घर पर अकेली रहती हूँ और आपका इस प्रकार यहाँ आना उचित नहीं है। और हमारा आपसी कोई रिश्ता भी नहीं है


कोमल को सब समझ में आ रहा था कि वह सब कुछ समझते हुए भी नासमझ बनने का ढोंग कर रहा है। मन ही मन वह प्रार्थना कर रही थी कि भगवान जितनी जल्दी हो सके इससे पीछा छुडवा दें 


राकेश अपने दांत बिखेरते हुए बोला ..अरे भाभी जी रिश्तों का क्या है वो तो बनाने से बनते है। बहुत से अलग-अलग शेहरो में मेरी प्रिय भाभियाँ है। उनकी तरह आप भी देवर-भाभी का रिश्ता बना लीजिये |

तब तक रामू चाय-नाश्ता लेकर आ गया, उसने राकेश को नाश्ता करवाया और वह चला गया


अब कोमल परेशान सी रहने लगी ओर रातों की नींद उड़ने लगी। उसके डर ने मन में घर कर लिया कि आखिर वह चाहता क्या है? कभी ऐसा भी कुछ नहीं बोलता कि उसके चरित्र पर सवाल किया जा सके और उस पर विश्वास किया जाए इस लायक भी नहीं लगता। कहीं उसकी मंशा तो गलत नहीं, ..आकाश भी उसे बहुत अच्छा मानते है वो भी मेरी परेशानी नहीं समझ रहे है


अगली बार जब राकेश घर आया तो राकेश जी भी घर पर ही थे। उनको देखकर ..लम्बी-लम्बी छोड़ने लगा ..देखा भाभी जी मैंने कैसे झट से काम करवा दिया। बहुत बड़े लोगों के साथ उठता-बैठता हूँ मैं, अपना काम चुटकियों में निकलवा लेता हूँ। आपने तो फिर देखा ही है मेरा कमाल

कोमल वहाँ से उठकर रूम में चली गयी ओर आकाश की ओर इशारा करके रूम में आने को कहा 

आप मानो या ना मानो ..ये राकेश बहुत बड़ा तिकड़म बाज़ है। हम ठहरे सीधे-साधे कहीं इसके चक्कर में ना फँस जाए। आप किसी भी तरह इसे हमारी ज़िन्दगी से दूर कर दीजिये

आकाश को पहली बार कोमल के चेहरे पर एक अजीब सा डर नज़र आया, उसकी बात को ध्यान से समझते हुए उसे अपने सीने से लगाया और वापस राकेश के पास गया। जब राकेश ने जाने के लिए कहा तो उसे बाहर रोड तक छोड़कर आया |


दो-तीन महीने बीत गए कोमल डरती रही कि कब वह आ जाए, पर ऐसा नहीं हुआ वह नहीं आया 

एक दिन कोमल ने आकाश से पूछा ..कि आप उसे बाहर तक छोड़ने गए तब ऐसा क्या हुआ कि वह आज तक वापस नहीं आया |

आकाश बोले मैंने उससे सीधे कहा कि अगर मुझसे कोई काम हो तो मेरे ऑफिस आ सकते हो, मेरी पत्नी तुम्हारा अचानक किसी भी समय चले आना पसंद नहीं करती। आगे से कभी भी घर मत आना,यह बात मुझे सीधा तुम्हारे मुह पर बोलनी पड़ रही है क्योंकि कई बार कोमल तुम्हे समझा चुकी है फिर भी तुम्हे समझ नहीं आया इसलिए आज मुझे तुम्हे सीधी तरह समझाना पड़ रहा है। उसे बेवजह अनजान लोगों से बात करना पसंद नहीं, समझदार के लिए इशारा ही काफी होता है। मैं आशा करता हूँ तुम मेरी बात को आसानी से समझ गए होंगे ..तब जाकर कोमल को चैन की साँस आयी |

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दोस्तों जाने अनजाने हम कई अनजान लोगों से रिश्ते जोड़ लेते है। जो हमें आगे चलकर हानि पहुँचा सकते है। इसलिए हमेशा सतर्क रहना चाहिए । कहानी पसंद आई हो तो अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें। 


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